Wednesday, 7 October 2026

है पर है नहीं…


ए.आई. ने जो दिखाया - 
है पर है नहीं, देखा तो सही, पर वो है नहीं।  सपने के जैसा-  आँखों में तो है, पर छू न सकोगे।  मीठा तो है, पर स्वाद कहाँ है, ढूँढ़ो तो पाओगे नहीं।  विचार के जैसा, कविता के जैसा, सुंदरता के जैसा, मन को रोशन करता है, पर बोलो, है क्या कहीं? अस्तित्व माया है, कहता है संत, लेके मोबाइल फ़ोन माया को सरकाता है, सामने कोयल कूकती है, वो बेखबर है…

© मनन शील।


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