Tuesday, 15 September 2026

बच्चे!


बच्चे! वे अपने चेहरे पर  जो था उसकी शांति लेकर चलते हैं,  और हम बैचेनी का सागर ढोते हैं, हम चुन-चुनकर किसी की फिक्र करते हैं,  उनसे स्वतः सबकी फिक्र होती है,  सब में फिर चाँद - तारे, जल-जीव,  मनुष्य और जो कुछ है,  वो सभी आता है!

© मनन शील



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